सिंधु घाटी सभ्यता की संपूर्ण जानकारी

 सिंधु सभ्यता और संस्कृति:-

 सिंधु घाटी सभ्यता की खोज से पहले भारत की सर्वाधिक प्राचीन सभ्यता वैदिक सभ्यता को मानी जाती थी लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता की खोज के बाद भारत की सर्वाधिक प्राचीन सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता मानी जाने लगी


  सिंधु घाटी सभ्यता की विशेषताएं

 इस सभ्यता के निम्नलिखित विशेषता है

1. या कास्य युगी सभ्यता थी ना कि लौह युगी 
2.  यह सभ्यता शहरी थी ना कि ग्रामीण
3.  इस सभ्यता वाले अभी भी पत्थरों के औजार का प्रयोग करते 

  सिंधु घाटी सभ्यता के काल

 इस काल के संबंध में काफी विवाद है लेकिन C 14  पद्धति के आधार पर इस काल का  सर्वमान तीथी 2350  ईसा पूर्व से 1750  ईसा पूर्व माना जाता है 

सी14  पद्धति क्या है

सी14  के आधार पर जीवाश्म में कार्बन उपस्थित तत्व कार्बन को माना जाता है जिस जीवाश्म में कार्बन की मात्रा अधिक होती है उसे नवीन माना जाता है और जिस में कार्बन की मात्रा कम उसे पुराना मारा जाता है C14 के आधार पर किसी जीवाश्म की आयु ज्ञात की जा सकती है

 सिंधु घाटी सभ्यता का क्षेत्रफल

सिंधु घाटी सभ्यता  का क्षेत्रफल 12,99,600  वर्ग किलोमीटर ( 1300000) जिसमें अभी तक 1500 बस्तियां खोजी जा चुकी है  इस सभ्यता का आकार त्रिभुजाकार है वर्तमान में पाकिस्तान से बड़ा , इस सभ्यता का विस्तार वर्तमान समय में भारत पाकिस्तान और अफगानिस्तान मेंं फैला है. 

सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थल

1.  हड़प्पा:-  हड़प्पा को हड्युपिया भी कहा जाता है यह पाकिस्तान से पंजाब प्रांत में स्थित है ,यह रावी नदी के किनारे बसी है इनकी खुदाई  दयाराम साहनी के नेतृत्वव में 1921 में किया गया था।

हड़प्पा सभ्यता के महत्वपूर्ण अवशेष

 हड़प्पा के अन्नागार, एक मृत्भाड पर  बना मछुआरे का चित्र ,संख का बना बैल, यहां गेहूं और जौ के दानों का अवशेष मिला है

 2 . मोहन जोदाड़ो:- इसे मृतकों का टीला भी कहा जाता है यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में स्थित था यह सिंधु घाटी के किनारे स्थित था इसकी खुदाई राखल दास बनर्जी के नेतृत्व में 1922 ईस्वी में हुई थी यहां से विशाल स्नानागार ,विशाल अन्नागार, गले तांबे का ढेर, सबसे महत्वपूर्ण अवशेष नृत्य करती हुई कास्य की मूर्ति मिली है

3. चन्टप्दडो :- यह मोहनजोदाडो और हड़प्पा के बीच स्थित थी। यहां की खोज मजुमदार ने की थी।यहां से गुड़िया बनाने वाले करखाना का अवशेष मिला है इसके अलावा अल्कृत हाथी, कुत्ते द्वार बिल्ली का पिछा करते हुए पद चिन्ह प्राप्त हुआ है 

4. लोथल :- 

यह गुजरात के भोगवा नदी के किनारे अहमदाबाद जीले में स्थित था इसकी खुदाई रंगनाथ राव के नेतृत्व में किया गया था याहां से अनेक प्रकार के अवशेष प्रात हुए ।चावल गोदीवाडा बंदरगाह फारस के मुहर तथा मेटोपोटामियाई के सिक्के मिले है 

5.रोपड़:- 

यह पंजाब के रोपड़ जिले में सतलज नदी के किनारे स्थित है यहां से प्राप्त प्रमुख अवशेष तांबे की कुल्हाड़ी है

6 .कालीबंगा:-  

यह राजस्थान के गंगानगर जिले में घग्गर नदी के किनारे तट पर स्थित है कालीबंगा का अर्थ -काली रंग की चूड़ी होती है यहां से प्राक  हड़प्पा और हड़प्पा कालीन अवशेष प्राप्त हुई यहां का प्रमुख अवशेष ध्वनकुडं, जूते हुए खेत और अलकृत इट पाई गई है

 7.सुरकोटडदा :-  यह गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है यहां से घोड़े की अस्थियों का अवशेष प्राप्त हुआ है

8.  आलमगीरपुर :- यह उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में यमुना के सहायक हिंडन नदी के किनारे स्थित है यहां सर्व पूजा का  अवशेष प्राप्त हुआ है

9. रंगपुर:-  यह  गुजरात के कटिया बांध प्रायद्वीप में मंदिर दीप के समीप है यहां की प्रमुख अवशेष धान की भूसी है

10.  बनावली :- यह हरियाणा के हंसार जिले में स्थित है यहां से अच्छे किस्म के जो प्राप्त हुए हैं

11.  सुतकांगेडोर :- यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के दशक नदी के किनारे स्थित है यह सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे पश्चिमोत्तर भाग है यहां से समस्त  फारस के साथ व्यापार होता था यह  मरकान द्वीप पर स्थित है

सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल एवं खोजकर्ता

 प्रमुख स्थल           खोजकर्ता                  नदी

 हड़प्पा        -       दयाराम साहनी   -        रावी 

 मोहनजोदाड़ो -   राखल दास बनर्जी  -    सिंधु

 लोथल       -       रंगनाथ राव       -         भोगवा

 चन्हूदडो   -      गोपाल मजमुदार  -           x   

 बनावली    -      रविंद्र सिंह  पिस्त  -      रंगोई

 सुतंकांगेडोर -   R . L बेस्टाइन     -    दासक

 सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख चौहद्दी

उत्तर में जम्मू के माडा, दक्षिण दक्षिण में महाराष्ट्र के दैमाबाद, पश्चिम में  सतकांगेडोर और पूरब में यूपी के आलमगीरपुर


 सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि

सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि भाव चित्रात्मक थी इसे ही गुस्त्रॊदन (  चित्रच्छश अज्ञात लिपी )  भी कही जाती है इसमें कुल 400 अक्षर थे जिसमें 64 अक्षर को हमेशा  दोहराए गए हैं यह लिपि दाएं से बाएं की ओर लिखी जाती है

 सिंधु घाटी सभ्यता का मोहर

यहां से तकरीबन 2000 मोहर पाई गई है यह मोहर बेलनाकार ,वर्गाकार ,आयताकार ,और वृत्ताकार  के रूप में मिली है मोहर का निर्माण अधिकतम सेलखड़ी से मिलती है इसमें संक्षिप्त लेख, एक सिंगी बाघ ,गेंडा आदि जानवरों के चित्र अंकित हुआ है( गाय नहीं ) मोहनजोदड़ो से कासे का एक मोहन मोहर प्राप्त हुई है जिस पर पशुपति शिव की आकृति बनी है मोहनजोदड़ो ,लोथल एवं कालीबंगा से राज मुद्रक मिले हैं

 सिंधु घाटी सभ्यता का धर्म :- 

हड़प्पा संस्कृति में कहीं भी मंदिर या देवालय का चिन्ह नहीं मिला यहां के लोग वृक्ष ,पशु ,मात्री देवी, वनदेवी की पूजा करते थे सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष पीपल था और इसके अलावा बबूल,निम एवं तुलसी की पूजा की जाती थी भगवान शिव की पूजा उस समय पशुपति के रूप में किया जाता था इसके अलावा शिवलिंग, स्वास्तिक,सर्प पूजा ,जल पूजा किया जाता था लोथल एवं कालीबंगा से अग्निकुंड का अवशेष मिला है जिससे यह पता चलता है कि वे लोग अग्नि पूजा भी करते थे उनका एक सिंगी वस्तु काल्पनिक वस्तु था जिसकी पूजा की जाती थी

 सिंधु घाटी सभ्यता की सावधान की प्रक्रिया

 यहां अंत्येष्टि संस्कार के तीन प्रकार होते थे

1. पूर्ण समाधिकरण :-  शव को भूमि में दफना दी जाती थी

2.  आंशिक समाधिकरण :- 

 पशु पक्षी के द्वारा शव को खाने के बाद शव के शेष भाग  को दफना दिया जाता था

3.  दाह संस्कार:-   शव को पूर्ण  रूप से  जला दिया जाता था

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By:- Avinash Kushwaha 


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