सिंधु घाटी सभ्यता की सड़कें:-
शहरी सभ्यता होने के कारण यहां पर सड़कों का जाल बिछा हुआ था यह सड़कें पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर जाती हुई एक दूसरे को समकोण काटती थी इनके मुख्य मार्ग की चौड़ाई लगभग 9.17 मीटर तथा इनकी गलियां 3 मीटर चौड़ी होती थी
सिंधु घाटी सभ्यता के नालियां
यहां की नाली संरचना बहुत ही सुंदर थी इतनी सुंदर व्यवस्था इसके समकालीन सभ्यता मेसोपोटामिया या फारस में भी नहीं थी यह नलियां पक्की इट्टो की बनी होती थी और ढकी रहती थी और जितनी भी छोटी नलिया थी बड़ी नलिया से मिली होती थी और पानी को गड्ढे में इकट्ठा किया जाता था और संरक्षित पानी से सिंचाई की जाती थी
सिंधु घाटी सभ्यता है कृषि
यहां के किसान मूल रूप से रबी फसल उगाते थे फसल बोने का एक समय नवंबर और काटने का समय अप्रैल था बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र होने के कारण खासकर यह लोग रबी फसल उगाते थे अभी तक 9 फसलों की पहचान हो चुकी है जैसे गेहूं जौ कपास मटर इत्यादि कपास की मुल भूमि सिंधु घाटी सभ्यता थी
पशुपालन:-
यहां के लोग बैल ,भैंस, कुत्ता ,सूअर, हाथी ,मोर ,बकरी का पालन करते थे इन्हें घोड़े की जानकारी नहीं थी
शिल्प एवं उद्योग धंधे:-
इस काल के लोग मिट्टी के बर्तन बनाने में माहिर थे यहां के लोग बर्तनों पर चित्र भी बनाते थे उनका व्यापार विदेशों में भी होता था इस कल के लोग तांबा में टिन मिलाकर कासे तैयार करते थे इस प्रकार के उद्योग धंधे यहां से विराजमान थे जैसे बर्तन उद्योग , चूड़ी उद्योग,
व्यापार एवं वाणिज्य
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग अंतरााजिव और अंतराष्ट्रीय व्यापार करते थे इनका व्यापारिक संबंध फारस ,मेसोपोटामिया ,मिश्र ,कृत ,दिलमुल और मरकार था उस समय उल्लेखित मेलूहा के पहचान वर्तमान में सिंधु घाटी से की गई है अफगनिस्थान से टिन ईरान से सोना एवं चांदी हिमालय से शिलाजीत राजस्थान के खेताड़ी से तंबा और कोलार की खान से सोना मंगवाया लगा था
सिक्का
सिक्का धातु सेलखड़ी और मिट्टी से मिली है यहां से पता चलता है कि व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली के अलावा नगद प्रणाली पर भी आधारित था
प्रमुख बंदरगाह
व्यापार हमेशा समुद्री मार्ग से होता था इस काल के प्रमुख बंदरगाह लोथल ,सुतकांगेडोर, देसलपुर भगतराव था मेसोपोटामिया में प्रवेश करने हेतु उर एक प्रमुख बंदरगाह था
अन्नागार
यह मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत थी यह 45.72 मीटर लंबा 28.86 मीटर चौड़ा था व्हीलर से ने इसे अन्ना गार की संज्ञा दी थी सिंधु घाटी सभ्यता के ईटों का अनुपात 4:2:1 था
वृहत स्नानागार
मोहनजोदड़ो की यह महत्वपूर्ण इमारत मानी जाती है इस स्नानागार में उतरने के लिए सिडीया थी यह पक्की ईंटों का बना होता था इसमें जिप्सम के गारे का प्रयोग किया गया था प्रोफ़ेसर मार्शल ने इस निर्माण को तत्कालीन विश्व का एक आश्चर्यजनक निर्माण बताया
सिंधु घाटी सभ्यता के पतन
सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के सर्वाधिक कारण है
1. बाढ़ के द्वार
2. आर्यों के आक्रमण के द्वारा
3. भूकंप के द्वारा
4. महामारी के द्वारा
5. आग में जलने के कारण
Note:- कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनका पतन नहीं हुआ बल्कि इसका स्थानांतरण हुआ 1820 तक आते-आते हड़प्पा और मोहनजोदड़ो का पतन हो गया
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By:- Avinash Kushwaha



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