प्रकृति में मूल बल तथा मूल बल के प्रकार

  मूल बल क्या है

मूल बल वह बल है जो पूरे ब्रह्मांड का संचालन करता है उसे मूल  बल कहते हैं



 मूल बल के प्रकार

प्राकृतिक में मूल बल चार प्रकार के होते हैं

1. गुरुत्वाकर्षण मूल बल

2.  विद्युत चुंबकीय मूल बल

 3. प्रबल नाभिकीय मूल बल 

4. दुर्बल  नाभिकीय मूल बल

 गुरुत्वाकर्षण बल क्या है?

हमारे ब्रह्मांड में जितने भी वस्तु है वह एक दूसरे को आकर्षित करती है तो 

       सभी पिंड के अंदर मौजूद आकर्षण बल को ही गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं

 यह बल सभी पिंड पर कार्य करता है तथा इसका  परास बहुत अधिक यानी अनंत तक होता है कहने का मतलब है कि चाहे   वस्तु कितनी भी दूर क्यों ना हो दोनों के बीच यह बल जरूर लगेगा लेकिन इसकी प्रबलता बहुत कम 10^-39 होता है यानी कि यह बल बहुत ही कमजोर बल होता है जैसे मान लीजिए कि आप किसी वस्तु को उठा रहे हैं अभी आपके हाथ में मोबाइल होगा इसको आप  कितनी आसानी से उठा रहे हैं जबकि पृथ्वी और उस वस्तु के बीच गुरुत्वाकर्षण बल काम कर रहा है अगर गुरुत्वाकर्षण बल ताकतवर बल होता तो आप अपने मोबाइल को इतनी आसानी से नहीं उठा पाते

   गुरुत्वाकर्षण बल की प्रबलता बहुत कम 10^-39 तथा इसका परास बहुत ज्यादा (अनंत) होता है



2.  विद्युत चुंबकीय बल क्या है?

जब किसी चालक में विद्युत धारा है यानी कि उसमें आवेश का प्रवाह हो रहा है जब किसी चालक में आवेश प्रवाहित होता है तो उस चालक के चारों तरफ एक बल का अनुभव करते हैं जिसे चुंबकीय प्रभाव कहा जाता है और उस बल को चुंबकीय बल कहा जाता है

 यह बल आकर्षण एवं  प्रतिकर्षण के गुण के परिवर्तन पर आधारित है और इस बल का परास  भी अनंत होता है तथा इसकी आपेक्षिक प्रबलता 10^-2 है तथा यह सभी आवेशित कणों पर कार्य करता है

 विद्युत चुंबकीय बल का उपयोग

 इस बल के द्वारा ही अनंत गैलेक्सी, ब्रह्मांड और संचार जैसी व्यवस्था एवं दैनिक जीवन में इसका प्रयोग कर जानकारी हासिल करते हैं

 3.प्रबल नाभिकीय बल क्या है?

वह नाभिकीय बल जो नाभिक में उपस्थित धन आवेशित प्रोटॉन तथा  उदासीन न्यूट्रॉन को मजबूत बल से बांधकर रखता है उस बल को प्रबल नाभिकीय बल कहते हैं

Note:- प्रोटोन का सबसे छोटा कण  Quark है  जो रंगीन आवेशित कण है यही रंगीन आवेशित कण नाभिक के अंदर आकर्षण बल उत्पन्न करता है जिससे नाभि के अंदर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बंदे होते हैं इस बल का परास लघु यानी कि 10^-2m  होता है यह न्यूक्लोन धारी मूलकड के बीच कार्य करता है

 4. दुर्बल नाभिकीय बल क्या है?

 जब नाभिक में भार बढ़ जाता है तो  Quark  कण का आकर्षण बल कमजोर पड़ जाता है जिसके फलस्वरूप प्रोटोन नाभिक से बाहर निकल जाते हैं तो जिस कमजोर बल के कारण प्रोटोन नाभिक से बाहर आ जाते हैं उस बल को दुुर्बल नाभिकीय बल कहते हैं

 यह कण कुछ मूल कण विशेषकर इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉनो के बीच कार्य करते हैं तथा जिसका परास बहुत कम यानी 10^-6m  है तथा आपेक्षिक प्रबलता 10^-19  है

 आशा करता हूं कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा अगर आपको लगता है कि आपको हमारी  पोस्टर से कुछ भी सीखने को मिला है तो कृपया अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें



Post a Comment

0 Comments