Trick:- चंपा खेड़ा के खिलाफ असहयोगी डंडो से वि भागे नहीं
चंपा:- चंपारण सत्याग्रह ( 1917 मे) नील की खेती रोकने हेतु
उस समय हमारे देश में अंग्रेजों का शासन था और अंग्रेजों का कहना था कि अगर आप 1 बीघा की खेती करते हैं तो उसमें से 3 कट्ठा में आपको नील की खेती करनी होगी जो कि किसानों को नामंजूर थी क्योंकि नील की खेती करने से खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती इसलिए महात्मा गांधी ने किसानों का साथ दिया और नील की खेती को बंद करवाया
खेड़ा :- खेड़ा सत्याग्रह( 1918 ), लगान में वृद्धि खत्म करने हेतु
उस समय हमारे यहां अकाल जैसी स्थिति हो गई थी और ऊपर से अंग्रेजों ने कर में वृद्धि कर दी थी जिससे किसान परेशान हो गए थे तभी महात्मा गांधी ने एक आंदोलन किया जिसे खेड़ा आंदोलन के नाम से जानते हैं जिसमें किसानों की कर को माह कराया गया अंग्रेजों द्वारा यह निर्धारित किया गया कि जिस किसान का फसल अच्छा हुआ है वह कर देगा और जिसका फसल नहीं हुआ है वह कर नहीं देगा
खिलाफ :- खिलाफत आंदोलन ( 1919 ) , खलिया की सत्ता स्थापना हेतु
असहयोगी :- असहयोग आंदोलन ( 1920) स्वराज्य हेतु
डंडो :- दांडी मार्च ( 1930 ) नमक कानुन तोडने हेतु
से:- सविनय अवज्ञा आंदोलन ( 1930) पूर्ण स्वराज हेतु
वि :- व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन ( 1934) पूर्ण स्वराज हेतु
भागे:- भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

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